ऐ अन्ज़ान बाबू,
जो खुद बदनाम है आज़मगढ़ शहर में,
वो… अब हमें बताता है जीने का तरीका।

ए दिल जरा बता दे ,ये कैसे है मुनासिब,
कि प्यार भी हो जाये,बर्बाद भी न हो हम,

अबतक नही हुआ जो,वो चाहता है तू क्यों, Read more

मैने छोड़ा है शहर,एक कसम के लिये,
कोई बदनाम न हो जाये,कंही मेरे लिये,

तुम से मिल के,फिर कभी मेरा न रहा,  Read more

काश कि ये हालात,एकबार फिर बदल जाते,
अबकी तेरे बदलने से पहले,हम बदल जाते,

कितना ग़मज़दा रहा हूँ,तेरी जुदाई में सनम,  Read more

आगाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता
जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता

जब ज़ुल्फ़ की कालिख में घुल जाए कोई राही Read more

उसने नकाब फेंक कर एहसान कर दिया,
हमको बिना वजह ही बदनाम कर दिया ।

तारीख के समंदर में ताकत थी इस कदर,  Read more

ऐ अन्ज़ान,
नाम तो लिख दूँ तुम्हारा अपनी हर शायरी के साथ,
मगर फिर ख्याल आता है,
कि कितना अच्छा सा है नाम
मेरे अंज़ान का,
कहीं बदनाम ना हों जाए।

ज़िंदगी  धुआँ -धुआँ  शाम  सी  लगती है
हर  बात  खास  मुझे आम सी  लगती है

तन्हाइयों  के  घर  मुझे  छोड़  गया  वो Read more