आसउं दादू लड़ें सरपंची हमार।

बड़े शौखि से परचा भरिगा,
फोटो सोटो खीचिन। Read more

उठि भिन्सारे कहबा करी, के दादू थोड़ क पढ़िले,
बोर्ड कलास हइ करु न आलसि, लाला पढ़िले-पढ़िले।

जुलाई से स्कूलि खुली त, पोथी नहीं उठाय, Read more

मेरी एक बघेली कविता—

पतोहिया बीए पास हइ।

एमे ओमे पास बताइ के, लड़िका के किन्हिन शादी,  Read more