आँख प्यासी है कोई मन्ज़र दे
इस जज़ीरे को भी समन्दर दे

अपना चेहरा तलाश करना है  Read more

सच कहूँ तो…
फ़ुरसत ना थी उनको,
कुछ हम भी मग़रूर थे,
नाम उनका भी कुछ कम ना था,
कुछ हम भी “वकील साहब” मशहूर थे।

सब के कहने से इरादा नहीं बदला जाता
हर सहेली से दुपट्टा नहीं बदला जाता

हम तो शायर हैं सियासत नहीं आती हमको  Read more

माना महरूम हुये है हम तेरी चाहत से,
मगर यकीं उठा नही है अभी मोहब्बत से,

जब भी दिख जाओगे कंही राहों में हमें, Read more

माना महरूम हुये है हम,तेरी चाहत से,
मगर यकीं उठा नही है अभी मोहब्बत से,

जब भी दिख जाओगे,कंही राहों में हमें,  Read more

तुम्हे जब कभी मिले फुर्सत मेरे दिल से बोझ उतर दो,
मैं बहुत दिनों से उदास हूँ मुझे इक शाम तो उधार दो…

गुज़र गया आज का दिन भी पहले की तरह,
न हमको फुर्सत मिली न उन्हें ख्याल आया…