आँख प्यासी है कोई मन्ज़र दे
इस जज़ीरे को भी समन्दर दे

अपना चेहरा तलाश करना है  Read more

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची
ज़ुल्फ़ कन्धे से जो सरकी तो कमर तक पहुँची

मैंने पूछा था कि ये हाथ में पत्थर क्यों है  Read more

आँखों में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा
कश्ती के मुसाफ़िर ने समन्दर नहीं देखा

बेवक़्त अगर जाऊँगा, सब चौंक पड़ेंगे Read more

अजब दुनिया है नाशायर यहाँ पर सर उठाते हैं
जो शायर हैं वो महफ़िल में दरी-चादर उठाते हैं

तुम्हारे शहर में मय्यत को सब काँधा नहीं देते Read more

जहां को दिलवालों की कद्र करते किसने देखा है
किसी पत्थर को आख़िर आह भरते किसने देखा है

सदा से आते जाते हैं मौसम ये रुत बहारों की  Read more

चोट पत्थर से ही लगे ये जरूरी तो नही है
उनकी बेगानी निगाह भी ये काम करती है
आभा…

काश कि ये हालात,एकबार फिर बदल जाते,
अबकी तेरे बदलने से पहले,हम बदल जाते,

कितना ग़मज़दा रहा हूँ,तेरी जुदाई में सनम,  Read more

यूँ बेसब-बेवजह नही था, तेरा जुदा हो जाना,
शायद मेरी तकदीर में था, मेरा फ़ना हो जाना,

बहुत आसां है, आज इस मतलबी दुनिया में,
यूँ किसी धड़कते दिल का, पत्थर हो जाना,

~मनोज सिंह”मन