यूँ चेहरे पर नक़ाब लगाते हैं लोग,
कुरेद के ज़ख्म मेरे, मुस्कुराते हैं लोग,

आइने का ही ऐतबार हो तो कैसे हो,  Read more

चांदनी क्यों इतराती है खुद पे इतना,
कंही छुप जाये मेहताब,तो क्या होगा,

कुछ रुका सा है,नाजुक सी पलकों में,  Read more

जब कभी भी मन उदास होता है,
तन्हा होने का अहसास होता है,

क्यों ख़ुशी पल में यू रूठ जाती है,  Read more

अपने घर के सब दरवाज़े खोल दो
बंद कमरों में गीत नहीं लिख पाऊँगा ।

नक़ाब सारे हटा दो अपने चेहरे के  Read more