अपनी इन नशीली निगाहों को जरा झुका दीजिए जनाब,
मेरा मजहब मुझे नशे की इजाज़त नहीं देता ।

इत्तफाक से हमने कुछ दूर से ही देखा था उन्हे उस रोज़, यूँ निगाह बदलते बदलते…
के आज तक हमारी धड़कने बगावत करती आई है हमसे हर रोज़, हमें कोई गैर समझते समझते…

अच्छा ही था जो करीब से ना गुजरे… वरना,
बन्दा तो कब का परवरदिगार का मुलाजिम हो चुका था यूँ बेगैरत-ईमान फिसलते फिसलते…

गर आंखो को अश्क पीना आ गया होता
मेरी दीवानगी को भी जीना आ गया होता

भूल जाते हम भी हर इक गम अपना  Read more

चोट पत्थर से ही लगे ये जरूरी तो नही है
उनकी बेगानी निगाह भी ये काम करती है
आभा…

ऐ अन्ज़ान,
गलती बस इतनी थी कि उसको निगाह उठा के इक बार देखा था,
और उसने मेरे सिर पर इल्ज़ाम दिल चोरी का लगा दिया।

ऐ अन्ज़ान,
निगाहों में अभी तक दूसरा चेहरा नही आया,
भरोसा ही कुछ ऐसा था तुम्हारे लौट आने का।

उसने नकाब फेंक कर एहसान कर दिया,
हमको बिना वजह ही बदनाम कर दिया ।

तारीख के समंदर में ताकत थी इस कदर,  Read more

हाथों की लक़ीरों ने क्या खेल दिखाया,
जिनसे न मोहब्बत थी हमें उनसे मिलाया।

हाथों में नहीं दम पांवों भी थके हैं,  Read more

अगर बेवफ़ा तुझको पहचान जाते,
ख़ुदा की क़सम हम मुहब्बत न करते,
जो मालूम होता ये इलज़ाम-ए-उलफ़त, Read more

इक बार  नहीं  मैने  उसे   सौ बार कहा
इश्क़  आतिश  है  उसने  आबशार कहा

मुख़्तसर  कहा  बेखौफ़ और दमदार भी  Read more

मोहब्बत छोड़ तो दी उसने मगर पहचान इतनी बाकी है…
जब भी मिलता है निगाहें फेर लेता है…………
आभा..

समझ सको तो समझ लो मेरी निगाहों से,
की दिल की बातें जुबां से कही नहीं जाती…