ए दिल जरा बता दे ,ये कैसे है मुनासिब,
कि प्यार भी हो जाये,बर्बाद भी न हो हम,

अबतक नही हुआ जो,वो चाहता है तू क्यों, Read more

सच कहूँ तो…
फ़ुरसत ना थी उनको,
कुछ हम भी मग़रूर थे,
नाम उनका भी कुछ कम ना था,
कुछ हम भी “वकील साहब” मशहूर थे।

ऐ अन्ज़ान,
विधि छात्रावास के लड़के बहुत ही शरारती हैं,
आज फिर तुम्हारा नाम मेरे दरवाजे पर लिख गये।

ऐ अन्ज़ान,
लोग पूँछने लगे हैं मुझसे मेरे मुस्कुराने की वजह,
अगर हो इजाज़त तो तुम्हारा नाम बता दूँ।

किसी मोहब्बत वाले वकील से ताल्लुक है क्या?
मुझे अपना महबूब अपने नाम करवाना हैं..!!  Read more

ऐ अन्ज़ान,
नाम तो लिख दूँ तुम्हारा अपनी हर शायरी के साथ,
मगर फिर ख्याल आता है,
कि कितना अच्छा सा है नाम
मेरे अंज़ान का,
कहीं बदनाम ना हों जाए।

जब तेरे इश्क में, भुलाया खुद को,
अब लोग मुझसे, मेरा नाम पूछते है,

किस पे लिखते हो, इतनी शिद्दत से,
अब दोस्त मुझसे,  Read more