बस्तियां, महल, नगर उजड़ जाते हैं,
बसे बसाये मंज़र, उजड़ जाते हैं।
कुदरत के आगे जोर कहां चलता है,  Read more

बता दे यार मेरे तुझको प्यार है कि नही,
मेरे नसीब में भी कोई बहार है कि नही,

तेरी उम्मीद पे ठहरा हूँ मुद्दत से राहों में,  Read more

ए ज़िंदगी बड़ी अजीब हो तुम
अमीर तो कहीं ग़रीब हो तुम

कोई नाम दो अब रिश्ते को  Read more

बड़ा अजीब सा सिलसिला है मेरे नसीब का मेरे साथ
कश्ती पर बिठा कर मुझको सागर में सैलाब लाता है….
आभा….

इस से पहले के बे-वफ़ा हो जाएं;
क्यों न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएं;

तु भी हीरे से बन Read more

कमी तेरे नसीबों में रही होगी, कि तू मेरी ना हुई,
मैने तो कोशिश बहुत की, तुझे अपना बनाने की…
~मनोज सिंह “मन”