अपनी इन नशीली निगाहों को जरा झुका दीजिए जनाब,
मेरा मजहब मुझे नशे की इजाज़त नहीं देता ।

तुझे याद ना करू तो जिस्म टूटता है मेरा फ़राज़
उम्र गुजरी है तेरी याद का नशा करते करते…

हाथो मे शराब बदलती रहती है,
नशे का असर वही रहता है….
कमबख्त तसवीरें बदलती रहती है
पर कत्ल करने का अन्दाज़ वो ही रहता है …

नशा था उनके प्यार का जिसमे हम खो गये,
उन्हें भी नहीं पता चला कि कब हम उनके हो गये…