मैं तुम्हारे लिए, जिंदगी भर दहा,तुम भी मेरे लिए रात भर तो जलो !
मैं तुम्हारे लिए, उम्र भर तक चला,तुम भी मेरे लिए सात पग तो चलो..!

दीपकों की तरह रोज़ जब मैं जला,तब तुम्हारे भवन में दिवाली हुई,  Read more

नव वर्ष के अभिनन्दन को आतुर सारा संसार,

भूल गए वो ज़ख्म पुराने, वो खून का कारोबार!

पिछले वर्ष ने बहुत रुलाया , सबकी नींद उड़ा दी, Read more