नहीं अच्छे लगते उन वादों जैसे दिन,
कहां गए वो फरिश्ते जिन्होंने वादे किए थे।

उस दिन रह जाएंगे हम अकेले हमेशा के लिए
जिस दिन हो जाओगे तुम किसी के सदा के लिए।

ऐ अन्ज़ान,
जब से वकालत में आया हूँ, मेरी नींद भी अजीब हो गई है,
रात भर आती नही, और दिन भर जाती नही।

घड़ी की सुई हूँ रुक जाना है इक दिन मुझे
वो वक़्त है साथ ज़माने के चलना है उसे

—सुरेश सांगवान ‘सरु’

मोहब्बत है मुझे तुमसे एक दिन तुझको भी हो जायेगी
छायी है जो ये घटायें बनकर खुशियाँ बरस जायेगी
कुछ इस तरह से होंगे इक दुजे के हम
कि हमारी मोहब्बत मिसाल बन जायेगी।

शाम ढली हम घर चले
दिन भर मस्ती कर चले

रातें लाई घर हमें  Read more

पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैं
ज़मीं जहाँ भी खुले घर निकलने लगते हैं

मैं खोलता हूँ सदफ़ मोतियों के चक्कर में  Read more

“याचना नहीं अब………”

याद आ रही मुझको फिर
दिनकर की बात पुरानी वो।  Read more

दुनियाँ से न्यारी मेरी गुलगुल
पापा की प्यारी मेरी गुलगुल

आँखों का ख़्वाब रातों की नींद  Read more

मोहब्बत है मुझे तुमसे एक दिन तुझको भी हो जायेगी
छायी है जो ये घटायें बनकर खुशियाँ बरस जायेगी
कुछ इस तरह से होंगे इक दुजे के हम
कि हमारी मोहब्बत मिसाल बन जायेगी।

देखना मैं एक दिन चली जाउंगी
तुम्हारे लिए लफ्ज़ छोड़ जाउंगी
जो गिले शिकवे है आज कर लो
कल बहुत दूर निकल जाउंगी….
आभा….

आज तक सब खोया ही खोया था, बस एक तुम्ही को पाया है
और तुम भी अलविदा कह गये ये कहकर की छोड़ो सब मोह माया है
तुम क्या जानो क्या हालत हो गई है इस दिल की,
जो पूरी रात तुम्हारी याद मे रोया है।
ना मिलता है सुबह शुभ दिन का संदेश तुम्हारा ना रात में तुम्हारे ख्वाबों का साया है
आखिर ऐसी क्या वजह है जो तुम्हें ये लगने लगा की सब मोह माया हैं।

बहुत ढूंढा मैने
पर
अब नही मिलते हैं

वो पुराने दिन
जो  Read more

दिन गुज़र जाता है बेमुरव्वत राही की तरह
रात आती है फिर सवालों की भीड़ लिये…
आभा….

बहुत समय पहले की बात है ,किसी गाँव में एक किसान रहता था . वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था . इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था , जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था . उनमे से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था ,और दूसरा एक दम सही था . इस वजह से रोज़ घर पहुँचते -पहुचते किसान Read more

ख्वाहिश है इस दिल की ये
ऐ वक़्त ज़रा तू पीछे चल।
मैं जी लूँ फिर से लम्हे वो Read more

आगाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता
जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता

जब ज़ुल्फ़ की कालिख में घुल जाए कोई राही Read more

टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
जिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली

रिमझिम-रिमझिम बूँदों में, ज़हर भी है और अमृत भी Read more

मधुशाला भाग – 4 (हरिवंश राय बच्चन)
कल? कल पर विश्वास किया कब करता है पीनेवाला,
हो सकते कल कर जड़ जिनसे फिर फिर आज उठा प्याला,
आज हाथ में था, वह खोया, कल का कौन भरोसा है, Read more

अगर यूँ ही कमियाँ निकालते रहे आप….
तो एक दिन सिर्फ खूबियाँ ही रह जाएँगी मुझमें..