बे-क़रारी शोर मचा सकती है
आसमाँ सर पे उठा सकती है

रू-ब-रू हो मौत से इक बार तू  Read more

ज़िंदगी अपनी  है फिर  भी  उधार  लगती  है
कुछ  और नहीं ये  दुनियां  बाज़ार  लगती है

तेज़ धूप  और  बारिश ने  ये  हाल कर दिया  Read more

जिस कश्ती के मुक़द्दर में हो डूब जाना फ़राज़;
तूफानों से बच भी निकले तो किनारे रूठ जाते है…