तुझे पाने को तेरे नाम से कई दें चुका हूँ अर्जीयाँ,
चलती नहीं मेरी रज़ा सब चलती रब की मर्जीयाँ।
झूठी कसमें झूठे वादे झूठी तेरी मोहब्बते, Read more

बिके न सच और झूठ की दुकान बहुत हैं
वो इसलिए की दिल छोटा अरमान बहुत हैं

घर बसाना है मुश्किल ए दौर-ए-तरक्की  Read more

कितने झूटे थे हम मोहब्बत में
आज तू भी जिन्दा है और में भी

मैं दहशतगर्द था मरने पे बेटा बोल सकता है
हुकूमत के इशारे पे तो मुर्दा बोल सकता है

यहाँ पर नफ़रतों ने Read more

मुझसे बिछड़ के ख़ुश रहते हो
मेरी तरह तुम भी झूठे हो

इक टहनी पर चाँद टिका था Read more