मिलो जब तुम तो
बस
इतना मिल जाना
कि
तुम में तुम जी जाये
और
मेरा मै भी जिंदा रहे
आभा…..

तपती आंखो में कहां जीते हैं ख्वाब
धूप की जलन तो कहां पलते हैं ख्वाब

ख्वाहिशों की नर्म छांव में बैठे बैठे  Read more

कितने झूटे थे हम मोहब्बत में
आज तू भी जिन्दा है और में भी

ज़िक्र होता है मेरा बारहा उसकी जुबां पर
हिचकियाँ बेसबब मुझे यूँ ही नहीं आती

वो जब सोती है तो भीग जाता है तकिये का कोना  Read more

‘ग़ज़ब’ की ‘एकता’ देखी “लोगों की ज़माने में” … !
‘ज़िन्दों’ को “गिराने में” और ‘मुर्दों’ को “उठाने में” … !!