हम खुबसूरत नही औरो की तरह
पर इस में भी गलती हमारी नही

उस ऊपर वाले ने हमे बनाने में जल्दी कर दी
इसलिए चेहरा बनाने में कुछ कमी कर दी।

यूँ चेहरे पर नक़ाब लगाते हैं लोग,
कुरेद के ज़ख्म मेरे, मुस्कुराते हैं लोग,

आइने का ही ऐतबार हो तो कैसे हो,  Read more

एक सूनी अकेली राह चलती
चेहरे पर मुस्कान चस्पां किये
राह की झाड़ियों से रिवाज़ों Read more

मुफलिसी में भी यहाँ, सुकून से हर बशर रहता है,
उन रेशमी परदों की दीवारों से,डर लगता है।

कितनी आजादी है,इन बस्तियों में रहने वालों को, Read more

ये मेरी आदत बहुत पुरानी है
पढने और पढ कर लिखने की

मगर मैं अक्सर टूट जाती हूं  Read more

सुप्रभात

नये रिस्तों से बंधन, कुछ बेगाने हो गये,
अनजाने अपने हुए, अपने अनजाने हो गये।  Read more

आँख प्यासी है कोई मन्ज़र दे
इस जज़ीरे को भी समन्दर दे

अपना चेहरा तलाश करना है  Read more

परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता
किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता

बडे लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना  Read more

जहां तक हो सका हमने तुम्हें परदा कराया है
मगर ऐ आंसुओं! तुमने बहुत रुसवा कराया है

चमक यूं ही नहीं आती है खुद्दारी के चेहरे पर Read more

मेरे बद हालात पर हँसने लगे है लोग,
ताने भी कैसे-कैसे अब कसने लगे है लोग।

समझ रहा था जिन चेहरों को अपना मैं,
उन चेहरों में अब पराये बसने लगे है लोग।
-इन्दर गुन्नासवाला

अजब दुनिया है नाशायर यहाँ पर सर उठाते हैं
जो शायर हैं वो महफ़िल में दरी-चादर उठाते हैं

तुम्हारे शहर में मय्यत को सब काँधा नहीं देते Read more

यही है इल्म मिरा यही हुनर भी है
नहीं फसील-ए-अना यही गुज़र भी है

बसी है कहाँ इंसानियत जानूं हूँ  Read more

जब कभी भी मन उदास होता है,
तन्हा होने का अहसास होता है,

क्यों ख़ुशी पल में यू रूठ जाती है,  Read more

काश कि ये हालात,एकबार फिर बदल जाते,
अबकी तेरे बदलने से पहले,हम बदल जाते,

कितना ग़मज़दा रहा हूँ,तेरी जुदाई में सनम,  Read more

अपने घर के सब दरवाज़े खोल दो
बंद कमरों में गीत नहीं लिख पाऊँगा ।

नक़ाब सारे हटा दो अपने चेहरे के  Read more

कभी क़ातिल कभी ख़ुदा होगा
उनकी आँखों में क्या नहीं होगा ।।

अपने घर से जिधर भी जायेंगे  Read more

ऐ अन्ज़ान,
निगाहों में अभी तक दूसरा चेहरा नही आया,
भरोसा ही कुछ ऐसा था तुम्हारे लौट आने का।

मेरे चेहरे से जो जाहिर है जरा पढ़ करके बताना,
ऐ अन्ज़ान सुना है तुम एल-एल.बी.करते हो।

एक चेहरा था ,दो आखें थीं ,हम भूल पुरानी कर बैठे .
एक किस्सा जी कर खुद को ही, हम एक कहानी कर बैठे …

हम तो अल्हड-अलबेले थे ,खुद जैसे निपट अकेले थे , Read more

ज़िक्र होता है मेरा बारहा उसकी जुबां पर
हिचकियाँ बेसबब मुझे यूँ ही नहीं आती

वो जब सोती है तो भीग जाता है तकिये का कोना  Read more