चांदनी बिखरा रहा है चाँद फिर भी
लोग हैं के कैद करने में लगे हैं

सुरेश सांगवान’सरू’

बे-क़रारी शोर मचा सकती है
आसमाँ सर पे उठा सकती है

रू-ब-रू हो मौत से इक बार तू  Read more

चांदनी क्यों इतराती है खुद पे इतना,
कंही छुप जाये मेहताब,तो क्या होगा,

कुछ रुका सा है,नाजुक सी पलकों में,  Read more

आज से अब से  कोई  गीत  ऐसा  गाएँ  हम
चाहे गम मिले या खुशियां बस  मुस्कुराएँ हम

जब हदें  नहीं  कोई खुले इन आसमानों की Read more

ऐसा लगता ज़िन्दगी तुम हो
अजनबी कैसे अजनबी तुम हो।

अब कोई आरज़ू नहीं बाकी  Read more