खुशियाँ तो आजकल बोतलों में बंद हो गयी है दोस्तों
गम जब बढ़ जाता है तो खरीद लाते हैं।

सर-ए-राह-ए-तलब दुनियां ग़म लेती है
ज़ुल्फ है की उलझ कर ही दम लेती है

—सुरेश सांगवान ‘सरु’

गर मै तेरे अन्दर कहीं ठहर गयी हूं
तो हर सांस के साथ तुझमें जी लूंगी
आभा..

आ रहा था मज़ा जिंदगी का हमें,
शौक भारी पड़ा आशिकी का हमें,

दूर हम से हमारा सनम है अभी, Read more

कितने बदल गये हालात किसी के जाते ही
बदली मौसम की भी जात किसी के जाते ही

गम किस बला का नाम है दर्द का पता ना था
निकली अश्क़ों की बारात किसी के जाते ही  Read more

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का ख़िलौना हैं
मिल जाये तो मिट्टी हैं खो जाये तो सोना है

अच्छा सा कोई Read more