हम खुबसूरत नही औरो की तरह
पर इस में भी गलती हमारी नही

उस ऊपर वाले ने हमे बनाने में जल्दी कर दी
इसलिए चेहरा बनाने में कुछ कमी कर दी।

इंतजार अब भी है तुम्हारा आज भी चाहत वही है।
माना कुछ गलतियां की है हमने मगर हम इन्सान बुरे नहीं है।

ऐ अन्ज़ान,
मेरी गलतियाँ,
मेरी कमियां,
मेरे सारे दोष,
अनदेखा कर देना।
क्योंकि मैं जिस शहर में रहता हूं,
उसे लोग आज़मगढ़ कहते हैं।

इंतजार अब भी है तुम्हारा
आज भी चाहत वही है।
माना कुछ गलतियां की है हमने
मगर हम इन्सान बुरे नहीं है।

ऐ अन्ज़ान,
गलती बस इतनी थी कि उसको निगाह उठा के इक बार देखा था,
और उसने मेरे सिर पर इल्ज़ाम दिल चोरी का लगा दिया।

ऐ अन्ज़ान उससे कह दो कि मेरी सजा कुछ कम कर दें,
हम पेशे से वकील है मुज़रिम नही,
बस हमसे गलती से ईश्क हो गया था।