होता है हर एक का ख़्याल अपना नज़र अपनी
दौर-ए-गुमनामी में रखिये सिर्फ़ ख़बर अपनी

–सुरेश सांगवान’सरु’

पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैं
ज़मीं जहाँ भी खुले घर निकलने लगते हैं

मैं खोलता हूँ सदफ़ मोतियों के चक्कर में  Read more

लिखा ही समझते हैं न ज़बानी हमारी
यही है मुद्दत से परेशानी हमारी

दिया जो दिल किसी को वापस नहीं लेते Read more

ना किसी की यादों ने सताया कभी
ना कभी दिल टूटा हैं
हमारा दिल तो वो पानी है दोस्तों
जो अपनी मस्ती मे बहता है
फिर भी ना जाने क्यू ख्याल आजकल किसी अजनबी का रहता है।

कई राज दिल में है दफ़न ,
कई ख्याल दिल में जाग रहे ,
जो करते प्यार सचे दिल से ,
क्यूँ दूर दुखों से भाग रहे ,
उन्हें क्या पता यही मंज़िल है ,
आखिर यहीं पे तो आना है |

ऐ अन्ज़ान,
नाम तो लिख दूँ तुम्हारा अपनी हर शायरी के साथ,
मगर फिर ख्याल आता है,
कि कितना अच्छा सा है नाम
मेरे अंज़ान का,
कहीं बदनाम ना हों जाए।

हालात  ही  बदले  न  खुद  को बदल पाये हम
समझी हमें दुनियाँ न उस को समझ पाये हम

किसको   फ़ुरसत  है  जो   बैठे   पूछे  दास्तां  Read more

गुज़र गया आज का दिन भी पहले की तरह,
न हमको फुर्सत मिली न उन्हें ख्याल आया…