मुद्दतों बाद वो दिखे मुझे,
पर अपनों की निगरानी थी,
खुश्बू जानी-पहचानी थी। Read more

इक बार मुझे भर के नज़र देख लेने दो
अपनी मोहब्बत का असर देख लेने दो

हर तस्वीर में मेरी तेरे ही रंग हों  Read more

वो फूल निकला खुश्बू मुझमें छोड़ गया
हम खार बन के रह गए चुभते हैं आज भी

—सुरेश सांगवान’सरु’

जहां को दिलवालों की कद्र करते किसने देखा है
किसी पत्थर को आख़िर आह भरते किसने देखा है

सदा से आते जाते हैं मौसम ये रुत बहारों की  Read more

उल्फ़त में ग़म के ख़ज़ाने क्या- क्या निकले
हम अपनी आँखों को दिखाने क्या- क्या निकले

समझा था ये दिल तो उसे ही मंज़िल अपनी  Read more

ऐ अन्जान,
अब आदत सी हो गई है तुम्हारे करीब रहने कि,
इतना तो बता दो कि तुम्हारे सांसों कि खुशबू वाला परफ्यूम कहाँ मिलेगा।

ऐ अन्ज़ान,
खुशबू जैसे लोग है हम,
बस बिखरें-बिखरें रहतें है।

मेरे खपरैल वाले घर मे आज भी खूंटी पर लटका तेरी यादों का झोला…
ऐ अन्ज़ान वो जब भी खुलता है…
सच कहती हूं, पूरे घर में तुम्हारी खुशबू भर जाती है।

रफ़्ता रफ़्ता तुझसे वाबस्ता हो रहें हैं
जाने क्या मिल रहा है जाने क्या खो रहे हैं

तुझसे मिले हैं जब से दो आलम का है ये दिल  Read more

ग़ज़ल कुछ इस तरह से लिखने लगा है वो,
खुशबू की तरह दिल में महकने लगा है वो ।

आसुओं से करता रहा नफ़रतें जो उम्र भर, Read more

कभी आंसू कभी खुशबु कभी नगमा बनकर
हमसे हर शाम मिली है तेरा चेहरा बनकर

चाँद निकला है तेरी आँख के आंसू की तरह Read more

रंग  बहारों  के  उतर  क्यूँ जाते
ख़ुश्बू  के  तेरी  असर क्यूँ जाते

शाख-ए-मोहब्बत जो रहती हरी  Read more

ख़ुशी के इस पल में ये दिल बस मुस्कुराए,
हर गम भुला के प्यार भरे सपने सजाए,
इन हसीन पलों की खुशबु इस दिल को बहुत भाए,
शायद इन पलों का संगम ही जन्नत कहलाए। Read more

रौनक-ए-बज़्म, जीनत-ए-खुदाई,
नूर-ए-चश्म, हुस्न इन्तहाई ||

शब-ए-शायर, जाम-ए-शिरीं,  Read more

खुश्बूओं में खो रहे हैं
मुहब्बतो में जो रहे हैं

आज मिला है तू बमुश्क़िल
बस आँखों को धो रहे हैं  Read more

ये  मोहब्बत  है पनाह  में  नहीं रहती
बहुत देर  ख़ुश्बू गुलाब में  नहीं  रहती

बिखर जाती हूँ कागज पर बन के मोती  Read more

क्या कहूँ किसी एक को दिल ये ज़रा-ज़रा सबने तोड़ा
कुछ थे  मेरे  अपने  और  ज़रा- ज़रा  रब ने तोड़ा

देखा  है जब  भी ग़ौर से  इनसां  को  मैने किसी Read more

तुम्हारे जिस्म की खुशबू गुलों से आती है
ख़बर तुम्हारी भी अब दूसरों से आती है

हमीं अकेले नहीं जागते Read more