ऐ अन्ज़ान,
इस वकालत के पेशे में हर तरीका हमने आजमा के देखा है,
जो किस्मत से नही मिलते, वो किसी कीमत पर नही मिलते।

यूं तो हम भी अनमोल थे यारो ,
मगर उनकी पायल के आगे कीमत जरा कम पड़ गयी।

बिक जायें बाज़ार में हम भी लेकिन उससे क्या होगा,
जिस कीमत पर तुम मिलते हो उतने कहाँ है अपने दाम…
-ग़ुलज़ार