मेरी खिड़की पर जा बैठा
अजनबी सा ये सूनापन
घेर लेता है अक्सर ही Read more

जिस कश्ती के मुक़द्दर में हो डूब जाना फ़राज़;
तूफानों से बच भी निकले तो किनारे रूठ जाते है…