छोटी-छोटी बातों पर
गतिरोधी घटनाएँ
और उन पर फिर सियासत  Read more

बादशाह की मात को इक्के निकल आते हैं
पक्के वादे भी जब कच्चे निकल आते हैं

ये क़िताब-ए-ज़िंदगी और रिश्तों के धागे Read more

रिवाज़ न हो भले ही पढी किताबें पढने का//
जिंदगी के सीखे सबक रोज़ याद करने होते है//
आभा….

ऐ अन्ज़ान ईश्क़ कर लो, “बेइंतिहा” इन कानून की किताबों से..
बस एक यही हैं… जो अपनी बातों से कभी नही पलटेंगीं!

मेरे चेहरे से जो जाहिर है जरा पढ़ करके बताना,
ऐ अन्ज़ान सुना है तुम एल-एल.बी.करते हो।

पढ़ने वालों की कमी हो गयी है आज इस ज़माने में,
नहीं तो गिरता हुआ एक-एक आँसू पूरी किताब है…!!

ना लफ़्ज़ों का लहू निकलता है ना किताबें बोल पाती हैं,
मेरे दर्द के दो ही गवाह थे और दोनों ही बेजुबां निकले…

जो संभाल न पाती ठीक से किताबे अपनी,
आज उसने घर की सारी जिम्मेदारी संभाल ली..
– इन्दर मीणा