बादशाह की मात को इक्के निकल आते हैं
पक्के वादे भी जब कच्चे निकल आते हैं

ये क़िताब-ए-ज़िंदगी और रिश्तों के धागे Read more

लिखने को, कब लिखती हूं मैं
बस कागज़ पे दिल रखती हूं मैं
आभा..

परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता
किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता

बडे लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना  Read more

जहाँ इतने हैं ए दिल वहाँ एक फसाना और सही
जीने  का  तेरे  वादे  पे  एक बहाना और सही

और है  पानी ए दिल समंदर में आँखों के अभी  Read more

तहरीरें   काग़ज़   पर   उतार  लीजिये
लीजिये ये  क़लम   मेरा   उधार   लीजिये

जब  फ़र्श-ए-गुल लगा  दिया हवाओं ने Read more