इक रोज़ संग साथ बैठे बैठे
कलम कागज़ और कीबोर्ड बतिया बैठे

अपनी श्रेष्ठता के मद में कीबोर्ड चूर चूर था  Read more

अजब दुनिया है नाशायर यहाँ पर सर उठाते हैं
जो शायर हैं वो महफ़िल में दरी-चादर उठाते हैं

तुम्हारे शहर में मय्यत को सब काँधा नहीं देते Read more

देखना मैं एक दिन चली जाउंगी
तुम्हारे लिए लफ्ज़ छोड़ जाउंगी
जो गिले शिकवे है आज कर लो
कल बहुत दूर निकल जाउंगी….
आभा….

हुये दरबार में हाज़िर अगर पैग़ाम से पहले
हुआ है सर क़लम मेरा किसी इल्ज़ाम से पहले

ऐ अन्ज़ान, क्या बँटवारा था हाथ की लकीरों का भी,
उसके हिस्से में जज की कलम और मेरे हिस्से में वस वही वकालत।