घर मेरी उम्मीदों के सरहद पार तेरा है
दिल के आइने में फिर भी इंतज़ार तेरा है
—सुरेश सांगवान’सरु’

बता दे यार मेरे तुझको प्यार है कि नही,
मेरे नसीब में भी कोई बहार है कि नही,

तेरी उम्मीद पे ठहरा हूँ मुद्दत से राहों में,  Read more

यही है इल्म मिरा यही हुनर भी है
नहीं फसील-ए-अना यही गुज़र भी है

बसी है कहाँ इंसानियत जानूं हूँ  Read more

ज़र्रा ज़र्रा मेरा इंतज़ार करता है, कभी
तो सुनूं उन अनकही आयतों को
नाउम्मीद सी एक उम्मीद है बाक़ी बस
चुप सी लगी है इन ख़ामोश आँखों को
आभा..

परिंदों को आवाज़ लगाने पे रहने दे मुझे
शज़र की मानिंद रबा ठिकाने पे रहने दे मुझे

नहीं चाहिए कोई आसमान है इलित्जा मेरी यही  Read more

मैं अब तक
उस राह को ताक़ रही हूँ
जिससे तुम चले गए थे
सुनो तुमने कहा था Read more

कांटे रहे उस राह में,जख्मी है कदम अबतक,
प्यार जिंदा है मगर और,जिंदा है हम अबतक,

तेरे सिवा किसी और को,कभी न चाहेंगे सनम,  Read more

डबडबाई सी आँखों को ख़्वाब क्या दूं
चेहरा पढ़ने वालों को क़िताब क्या दूं

मुस्कुराहट और ये जलवा-ए-रुखसार  Read more

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है?
तुम ही कहो कि ये अंदाज़-ए-ग़ुफ़्तगू क्या है?

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल Read more