हसरत अभी बाकी है कुछ शाम अभी बाकी है,
तेरे होठों पे थिरकती हुयी ग़ज़ल लगती है यूँ, 

ग़ुमनाम मयकदे में हूँ, और जाम अभी बाकी है,  Read more

ऐ अन्ज़ान,
तुम मेरे ऊपर कोई इल्ज़ाम मत लगाओ,
मैने तुम्हें चाहा था यही इल्ज़ाम बहुत है।

हुये दरबार में हाज़िर अगर पैग़ाम से पहले
हुआ है सर क़लम मेरा किसी इल्ज़ाम से पहले

तुम मुझ पर लगाओ मैं तुम पर लगाता हूँ,
ये ज़ख्म मरहम से नही इल्ज़ामों से भर जायेंगे. ~a~

ऐ अन्ज़ान,
गलती बस इतनी थी कि उसको निगाह उठा के इक बार देखा था,
और उसने मेरे सिर पर इल्ज़ाम दिल चोरी का लगा दिया।

मुश्किल बस इतनी है,हमें जताना नही आता,
इल्ज़ाम ये लगा है कि हमें निभाना नही आता,

मिल्कियत मेरी भी बन जाती,औरों की तरह,  Read more