मंज़िल होगी आसमाँ ऐसा यकीं कुछ कम है
अपने नक्शे के मुताबिक़ ये ज़मीं कुछ कम है

—-सुरेश सांगवान’सरु’

पास आने नहीं देते
मुस्कुराने नहीं देते

बोझ ज़िम्मेदारियों के Read more

लगता है कि अब ठहर जाऊं मैं
चलते चलते अब थम जाऊं मैं
मैं नदिया हूँ तो मुझे मिलना ही होगा  Read more

आस्मां हमेशा मेरे ही कदमों में नजर आया करता है ~~
मां की दुआओं का हाथ सदा सिर पर छाया रहता है~~
आभा….

मां धरती है पिता आसमां है
मां पूजा है तो पिता महान है
जीवन चमकता दोनों के साथ
मां ममता है पिता सम्मान है…
आभा….

सामने के घर में जब देखी शमा,
अपने घर के वो उजाले याद आये।

भूलना चाहा किया जब दिल उन्हें, Read more