मेरी खिड़की पर जा बैठा
अजनबी सा ये सूनापन
घेर लेता है अक्सर ही Read more

है कहीं नहीं जो आस पास वो करीब सा लगे
जाने उस आवाज में क्या क्या रंग भरा लगे..
आभा…

हमारी आँख में रह कर भी हमसे दूर कितने हैं
उनके पास होकर भी हम मजबूर कितने हैं
दिल धड़कता है तो आवाज़ गुंजती है
उनकी याद में रहकर के हम खामोश इतने हैं

हमारी आँख में रह कर भी हमसे दूर कितने हैं
उनके पास होकर भी हम मजबूर कितने हैं
दिल धड़कता है तो आवाज़ गुंजती है
उनकी याद में रहकर के हम खामोश इतने हैं

मेरी आवाज़ सुनकर के तुम्हारा जी बहलता है
तुम्हारी इन अदाओं पर हमारा दम निकलता है

मेरी खामोशियों को जब से तेरा दिल समझता है  Read more

टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
जिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली

रिमझिम-रिमझिम बूँदों में, ज़हर भी है और अमृत भी Read more

तुम्हारी आवाज़ के लहज़े से
पढ़ती थी तुमको इसीलिए
तुमने अब मुझसे बात करना
बंद कर दिया शायद……
आभा….

गए ज़माना हुआ तुझे,
ऐ मेरे लख्त-ए-जिगर,
आ भी जा अब लौट कर,  Read more

नेपथ्य से आवाज़,
“तू कौन है?”
फिर एक शान्ति,
जवाब ??

एक प्राण, एक अन्तश्चेतना,  Read more