दोस्त मिरे ये जानकर आराम आ गया
अपना वही है वक़्त पे जो काम आ गया

–सुरेश सांगवान’सरु’  Read more

ऐ अन्ज़ान,
आओ कुछ देर मेरी चाहत की छाँवों में आराम कर लो,
बहुत थक गये होगें ना मुझसे नफरत करते करतें।

हमसे पूंछो शायरी मांगती है कितना लहू,
लोग समझते हैं कि धंधा बड़े आराम का है।