ये मेरी आदत बहुत पुरानी है
पढने और पढ कर लिखने की

मगर मैं अक्सर टूट जाती हूं  Read more

माना महरूम हुये है हम तेरी चाहत से,
मगर यकीं उठा नही है अभी मोहब्बत से,

जब भी दिख जाओगे कंही राहों में हमें, Read more

माना महरूम हुये है हम,तेरी चाहत से,
मगर यकीं उठा नही है अभी मोहब्बत से,

जब भी दिख जाओगे,कंही राहों में हमें,  Read more

इस जिन्दगी की बस एक ही कहानी है,
कंही ठहरा तो कंही बहता हुआ पानी है,

न जाने कोई राज़  बहते हुये अश्कों का,  Read more

ऐ अन्जान,
अब आदत सी हो गई है तुम्हारे करीब रहने कि,
इतना तो बता दो कि तुम्हारे सांसों कि खुशबू वाला परफ्यूम कहाँ मिलेगा।

तुम्हारे खूबसूरत नैन मुझे क्यूँ याद आते हैं।
मेरे दिल को बहुत बेचैन ये क्यूँ करते जाते हैं।।

वो हर पल जो तुम्हारे साथ गुज़रा याद आता है  Read more

कभी ज़रा सा थम के नहीं रहता ~~
वक्त की आदत बहुत पुरानी है
आभा..

तुम मुझसे दूर ही रहना मेरी आदत न हो जाये…
मेरे पास रहते-रहते  मुझसे चाहत न हो जाये..
इन्दर मीणा.