एक चेहरा था ,दो आखें थीं ,हम भूल पुरानी कर बैठे .
एक किस्सा जी कर खुद को ही, हम एक कहानी कर बैठे …

हम तो अल्हड-अलबेले थे ,खुद जैसे निपट अकेले थे , Read more

ये इश्क़ नहीं आसां, बस इतना समझ लीजिए,
इक आग का दरिया है और डूबकर जाना है…