कचरे का ढेर दरीचे में रख छोड़ा है मैनें
इन आँधियों का गुरूर कुछ यूँ तोड़ा है मैनें

–सुरेश सांगवान’सरु’

आबलापा कोई इस दश्त में आया होगा|
वर्ना आँधी में दिया किस ने जलाया होगा|

ज़र्रे-ज़र्रे पे जड़े होंगे कुँवारे सजदे,  Read more