यादों की कतरन जोड़ कर मैं आंचल बुन रही हूं
वक्त का रेशम धागा लेकर इक इक लम्हा चुन रही हूं
आभा..

सिर पर भारी बोझ उठाये चलता है
जिससे सारे कुनबे का पेट पलता है

आंगन से बाहर नहीं निकल पाती  Read more