वो मृगनयनी चंचल चितवन सी, इठलाकर जब चलती है,
हर पग पे घुँघरू बजते हैं, हर पग पे पायल बजती है,
लगती वो जैसे आसमान की, परी कोई मचलती है,  Read more

मिला जो हमें प्यार से, वो अपना सा लगा,
बिन मागें मिल गया सब,तो सपना सा लगा,

बिटिया विदा हुई घर से, रोया मै ज़ार ज़ार,  Read more

सिर पर भारी बोझ उठाये चलता है
जिससे सारे कुनबे का पेट पलता है

आंगन से बाहर नहीं निकल पाती  Read more

कहीं न कहीं तुम
मेरे शब्दों में झांक रहे
कैसे कहूँ याद नहीं आते हो  Read more

खंजर  देख  ना  कटार देख
तू क़लम देख और धार देख

आई  नहीं  ख़बर  इक तेरी Read more

बोल रहा था कल वो मुझसे हाथ में मेरा हाथ लिए
चलते रहेंगे सुख-दुख के हम सारे मौसम साथ लिए।

उसने अपनी झोली से कल प्यार के हमको फूल दिए Read more