#G4.

क्यूँ खोये खोये से मेरे दिलदार नज़र आते हैं,
कोई कह दे हम उनके दीदार को इधर आते हैं,

हथेली में मेरी अक्सर काँटे चुभाने वाले,  Read more

कोई दर्द, कोई चुभन जब हद से गुजर जाए,तो याद करना,
जिन्दगी में कभी जरूरत पड़ जाए,तो याद करना।

बिछड़ते वक्त के ये आखिरी, अल्फाज थे उनके, Read more

कितने बदल गये हालात किसी के जाते ही
बदली मौसम की भी जात किसी के जाते ही

गम किस बला का नाम है दर्द का पता ना था
निकली अश्क़ों की बारात किसी के जाते ही  Read more

गर आंखो को अश्क पीना आ गया होता
मेरी दीवानगी को भी जीना आ गया होता

भूल जाते हम भी हर इक गम अपना  Read more

यू गुमसुम ना बैठा करो,कभी खुद में भी होया करो,
क्यों गुनाह दिल से हुआ,कभी तुम भी तो सोचा करो,

क्यों घुट घुट के जीते हो,यू अश्क अपने ही पीते हो,  Read more

रख दे अब तू भी वहम का बादल निकाल के
क्या रख दूं तेरे सामने मैं दिल निकाल के

निकाल तो डाला मुझे महफ़िल से कई बार  Read more

इस जिन्दगी की बस एक ही कहानी है,
कंही ठहरा तो कंही बहता हुआ पानी है,

न जाने कोई राज़  बहते हुये अश्कों का,  Read more

मुश्किल बस इतनी है,हमें जताना नही आता,
इल्ज़ाम ये लगा है कि हमें निभाना नही आता,

मिल्कियत मेरी भी बन जाती,औरों की तरह,  Read more

ग़ज़ल पर ग़ज़ल मैं तुझको सोचकर लिखती रही
मेरी  ज़िंदगी   तुझे   मैं   उम्र  भर  लिखती  रही

क़िताब- ए- हसरत और मेरे अश्क़ों की सियाही  Read more

नाजुक सी मोहब्बत है, दुश्मन ज़माना है,
ये जन्मों का रिश्ता है, पर सबसे छुपाना है,

क्या तेरी मज़बूरी है, Read more

मिट्टी के घरोंदे है, लहरों को भी आना है,
ख्बाबों की बस्ती है, एक दिन उजड़ जाना है,

टूटी हुई कश्ती है, Read more

मेरे अश्क और तेरी यादों का, कोई तो रिश्ता जरुर है,
कम्बखत जब भी आते है, दोनों साथ ही आते है,
~मनोज सिंह “मन”