संकल्प करके अब,चले हैं इस जहांन में,
पांव न रुकेंगे अब,किसी भी तूफान में।
तठस्थ हो लिखे चलो,कलम ये झुके नहीं, Read more

न जाइये अंधेरों को यूँ मेरा हम सफ़र करके
कई काम अधूरे बाक़ी हैं आ जाओ सहर करके

–सुरेश सांगवान’सरु’

अंधेरों को हमसफ़र किया जाये
नज़रों को यूँ तेज़तर किया जाये

निकले हुए हैं तीर ज़माने भर से  Read more

यूँ लगने लगी है अब जहर जिंदगी,
तड़पा रही है कुछ इस कदर जिंदगी,

यंहा उजालों के पीछे अँधेरा है बहुत, Read more

ख़ुदाया प्यार में यूँ बंदगी अच्छी लगी
रही मैं ना मैं मुझे बेखुदी अच्छी लगी

खलाएँ जीस्त की मेरी तमाम भर गई  Read more

यूं भी जी लूंगी बस जिये जाने तो दो
काटूंगी बलायें ज़रा लफ्जों पे धार आने तो दो

अंधेरा मुंह छुपा के भाग जायेगा  Read more

ऐसा लगता ज़िन्दगी तुम हो
अजनबी कैसे अजनबी तुम हो।

अब कोई आरज़ू नहीं बाकी  Read more