सुबह की सफेदी ने आसमान का स्हाय रंग उडा डाला….
रात की हुकूमत लुट जाने से इन उदास तारों ने खुद को छिपा डाला….
उनके इश्क़ की हुकूमत ही इतनी थी हमारी रुह पर के ना चाहते हुए भी हमने उन्हें अपनी मल्लिका बना डाला……

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