शक्ल गर मेरी बदल गयी है
सूरत तुम्हारी भी अलग होगी
ये वक्त कब किसका सगा हुआ है 
मुझको घेरा है तुझको भी समेटा होगा
तेरे मन वो फूल से लम्हें निहाँ है
मेरे मन में भी उनकी याद बाक़ी है
ये जो चली है धूल भरी तूफानी हवा
उसका कुछ निशाँ तो उनपे तारी है
चल ज़रा वक्त से सौदा कर ले अब
वो थमे तो हम भी कुछ बदल जाएँ.
आभा..

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One comment on “शक्ल गर मेरी बदल गयी है…Abha

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    Jindagi to bebbaffa hai ek din thukraigi .
    Maut mehbubba hai shath leke jayegi. suresh

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