सबको रुसवा बारी-बारी किया करो
हर मौसम में फ़त्वे जारी किया करो

रातों का नींदों से रिश्ता टूट चुका
अपने घर की पहरेदारी किया करो

चाँद जियादःरौशन है तो रहने दो
जुगनू भईया ! जी मत भारी किया करो

जब जी चाहे मौत बिछा दो बस्ती में
लेकिन बातें प्यारी-प्यारी किया करो

रोज़ वही इक कोशिश ज़िन्दा रहने की
मरने की भी कुछ तैयारी किया करो…

-राहत इन्दौरी

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