रात की कालिख जब उफ़ान पर होती है
तेरी बाहों के चिरागों से तब सहर होती है

रोती है बहुत तब कोई नादान चकोरी Read more

फैसला कोई भी हो मैं हार ही जाऊँगी
दिल तेरे प्यार का मुद्दमा मुझसे जीता ना जायेगा

जाने क्या बात हुई कुछ दूरियों का सा गुमान है
मेरे महबूब तेरी हर अदा तेरे मौसम का पता देती है

तेरे कदमो की आहट रात भर सोने नही देती
इस कदर दिल पर मेरे तुम राह बनाये हो

नीतू