संकल्प करके अब,चले हैं इस जहांन में,
पांव न रुकेंगे अब,किसी भी तूफान में।
तठस्थ हो लिखे चलो,कलम ये झुके नहीं, Read more

खूब रंग उड़ाइये, खूब गाइये फाग।
हुड़दंग में मत भूलिए,मानवता का राग।।

रहे चेत इस बात का, न बिगड़े कछु काज।
ऐसी होली इस बार हो, स्वच्छ रहे समाज।।

मुस्कान पर कुर्बान था, मुद्दत की बात है,
कोई हंसी खेल न, मोहब्बत की बात है।

है पराई वो अगर, तो हैरत की बात क्या,  Read more

बस्तियां, महल, नगर उजड़ जाते हैं,
बसे बसाये मंज़र, उजड़ जाते हैं।
कुदरत के आगे जोर कहां चलता है,  Read more

बिना गाली-गलौज के उस बद्जबान को मेरा जवाब –

भारत माँ के जयकारे का,
तुझको है कोई ज्ञान नहीं।
तू फर्जों को भूल गया,  Read more

न डर दुश्मनों से जमाने से न डर,
डर दुराचार से बुराई से डर।

नेकी ही तेरी बदी को भगायेगी,  Read more

बुधिया ने हर बार की तरह
इस बार भी
पूरा खेत बोया था

लहलहाती फसलों को देख Read more

उठि भिन्सारे कहबा करी, के दादू थोड़ क पढ़िले,
बोर्ड कलास हइ करु न आलसि, लाला पढ़िले-पढ़िले।

जुलाई से स्कूलि खुली त, पोथी नहीं उठाय, Read more

तुम ही हो श्रृगार धरा का,
तुमसे है भूमि पावन।
जगत जननी अयुज तुम्ही हो,
करुं तुम्हें सौ बार नमन।

हर इंसान का धर्म होता है
धर्म आपसी एकता का
एक मजबूत जोड़ है

समाज में धर्म के नाम पर Read more

मुफलिसी में भी यहाँ, सुकून से हर बशर रहता है,
उन रेशमी परदों की दीवारों से,डर लगता है।

कितनी आजादी है,इन बस्तियों में रहने वालों को, Read more

सुप्रभात

नये रिस्तों से बंधन, कुछ बेगाने हो गये,
अनजाने अपने हुए, अपने अनजाने हो गये।  Read more

मेरी एक बघेली कविता—

पतोहिया बीए पास हइ।

एमे ओमे पास बताइ के, लड़िका के किन्हिन शादी,  Read more

आज मुद्दत बाद महफिल में शिरकत किया है कोई,
कि इस नाचीज पे रेहमत किया है कोई।

आज इतना खूबसूरत क्यों लगता है ताज,  Read more

उस जगह की पहले सी क्यों, शामो-सहर नहीं है,
क्यों तेरा शहर मेरा शहर नहीं है।

जब भी आया यहां मेहमान की तरह, Read more

एक दौर
जहाँ सिर्फ प्रगति की
विकास की बातें होनी थी
अत्याचार, भ्रष्टाचार के खिलाफ  Read more

फेर ली ग़र निगाहें, हया से किसी ने,
फ़कत इक नजाकत थी,नफरत न थी।

फिर तकल्लुफ किया,बदली राहें सभी,  Read more

रोज़ हौसलाअफजाई होती है,
रोज़ उनकी गली में रुसवाई होती है।
कैसे बताऊँ ज़माने वालों को,
कितनी शिद्दत से बुलवाई होती है।

आ चल लहरों संग नाचेंगे।

इक दूजे संग कैसा तालमेल,
अपनों से ऐसा मधुर मेल। Read more

छोटी-छोटी बातों पर
गतिरोधी घटनाएँ
और उन पर फिर सियासत  Read more