तुम क्या जानो ए साहिबा के कितना प्यार तुमसे करते है
दीदार पाने को तुम्हारा हर दिन हम दुआएं हजार करते है
क्यू तुम हमसे यू रूठे रूठे रहते हो 
क्यू तुम हमसे यू बेरूखी से बात करते हो
सोच लो
चले गए गर एक बार दुनिया तुम्हारी छोड़कर
फिर चाहे जितना बुलाना नही आयेगे वापस लौट कर।

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