ना पूछो के मंजिल का पता क्या है,
अभी बस सफर है सफर का दीदार  होने दो…

हमें परवाह नहीं की जीत  हमारी है या हार,
पर जिन्दगी से हमारी ये तकरार हैं तकरार होने दो…

हम शौक से रो लेते हमारी इस हार पर लेकिन
ये आगाज़ था हमारी अगली जीत का ये आगाज़ होने दो…

अभी एक सफर है… सफर का दीदार होने दो…

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