दूर जाने से पहले, मेरी जिंदगानी ले जा,
तू मेरे नादाँ दिल से, थोड़ी नादानी ले जा,

कैसे बताओगे सबको, जुदाई का सबब तुम, 
तेरे हक़ में लिखी है जो, वो कहानी ले जा,

तेरे खतों के साथ है, कुछ सूखे हुये फूल भी,
तू मुझसे नाकाम मोहब्बत, ये निशानी ले जा,

तुझे मुश्किल होगी, जब हुस्न ढलने लगेगा,
ठहर जरा, मुझसे मेरी बर्बाद ये जवानी ले जा,

तेरे उस बंजर शहर में, सूखा भी बहुत होगा,
आके मेरी आँखों से बहता, ये पानी ले जा.
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मनोज सिंह”मन”

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