मेरी सुबह तुम, मेरी शाम तुम,
मेरी जिंदगी तमाम तुम,

सब कुछ मेरा अब तुझसे ही,
मेरी ख़ास तुम मेरी आम तुम, 

मेरी जिंदगी तमाम तुम…
मौजूद नहीं तुम सामने,

हर पल मेरे पर साथ हो,
संग चलता हु लेकर तुम्हे,

हाथो में जैसे तेरा हाथ हो,
मिलती हो बस ख्वाब में,

लगता मुझे हो  सरेआम तुम,
मेरी जिंदगी तमाम तुम…

मेरी सुबह तुम…मेरी शाम तुम….

-इन्दर मीणा

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