मुहब्बत के सिवा जीने की तदबीर न देख,
रक़्स करना है तो फिर पांव की ज़ंजीर न देख.

–सुरेश सांगवान’सरु’

मंज़िल होगी आसमाँ ऐसा यकीं कुछ कम है
अपने नक्शे के मुताबिक़ ये ज़मीं कुछ कम है

—-सुरेश सांगवान’सरु’

सामने ये मेरे मंज़र नहीं होता
तू बसा गर दिल के अंदर नहीं होता

सुरेश सांगवान’सरु’

बे-क़रारी शोर मचा सकती है
आसमाँ सर पे उठा सकती है

रू-ब-रू हो मौत से इक बार तू  Read more

कितनी ही ना जाने शाखों में बटी हूँ
पत्नी हूँ माँ हूँ बहन और बेटी हूँ

–सुरेश सांगवान’सरु’

बोझ समझकर हाय उतार देते हैं
बेटी को कहाँ लोग प्यार देते हैं
—सुरेश सांगवान’सरु’  Read more

अपनी जगह खुश हूँ तेरा बीमार नहीं हूँ
उलझूँ किसी दामन से मैं वो खार नहीं हूँ

—सुरेश सांगवान’सरु’  Read more

दोस्त मिरे ये जानकर आराम आ गया
अपना वही है वक़्त पे जो काम आ गया

–सुरेश सांगवान’सरु’  Read more

वो ख़्वाब है हक़ीक़त बनता नज़र नहीं आता
ये ख़्वाब मिरा मरने तक मरता नज़र नहीं आता

—-सुरेश सांगवान’सरु’ Read more

दुनियां तमाम ख़रीद ली मेरी
नींद मगर भूल गये वो अमीर

—सुरेश सांगवान’सरु’ Read more

तलवार तीर तो कभी खंज़र भी आयेंगे
सेहरा कहीं कहीं पे समंदर भी आयेंगे

—-सुरेश सांगवान’सरु’

वो फूल निकला खुश्बू मुझमें छोड़ गया
हम खार बन के रह गए चुभते हैं आज भी

—सुरेश सांगवान’सरु’

ज़िन्दगी तेरे दर्द से हारता है कोई
प्यार दुनियां का ज़रूर मुग़ालता है कोई
—सुरेश सांगवान

ए फलक़ कभी देख तो आके ज़मीन पे
कैसे-कैसों को इसने संभाल रखा है

—-सुरेश सांगवान’सरु’

यादों को मिटाकर हक़ीक़त कर दो सनम
आओ पास आओ क़यामत कर दो सनम

—सुरेश सांगवान’सरु’

ठिकाना ढूँढती बहती हवा सी लगती हूँ
ज़िंदगी से नहीं खुद से खफ़ा सी लगती हूँ

मुझ में बस गई है आकर किस ज़ोर से देखो Read more

साँस टूट चली है इक तुम तक आने में
अभी तो घर भी जाना है यहाँ से

—सुरेश सांगवान’सरु’

माँ रोते में मुस्कुराना तुमसे सीखा है
कारे दुनियाँ का ताना-बाना तुमसे सीखा है

गर्दिश-ए-दौरा तो आनी जानी शै  Read more

माँ ही गुरू माँ ही ज्ञान
ईश्वर का उत्तम वरदान

पाठशाला तू ही तो है  Read more

ख़ुदाया प्यार में यूँ बंदगी अच्छी लगी
रही मैं ना मैं मुझे बेखुदी अच्छी लगी

खलाएँ जीस्त की मेरी तमाम भर गई  Read more