घड़ी की सुई हूँ रुक जाना है इक दिन मुझे
वो वक़्त है साथ ज़माने के चलना है उसे

—सुरेश सांगवान ‘सरु’

हुई शब तो चाँद -सितारों को पहरेदार किया
उतर के पानी में दरिया को खुद ही पार किया
—-सुरेश सांगवान ‘सरु’

कहा हुआ अपनों का अब सुनाई देने लगा
छुपा हुआ था जो तुझमें दिखाई देने लगा

—सुरेश सांगवान’सरु’

अंधेरों को हमसफ़र किया जाये
नज़रों को यूँ तेज़तर किया जाये

निकले हुए हैं तीर ज़माने भर से  Read more

देखें हवाएँ ले चलें अब कहाँ तक मुझे
मजबूरियों ने चलाया है यहाँ तक मुझे
-सुरेश सांगवान’सरु’

शाम ढली हम घर चले
दिन भर मस्ती कर चले

रातें लाई घर हमें  Read more

नहीं आसां नहीं है यहाँ सम्भल जाना
ज़िंदगी नहीं है मौसम का बदल जाना
—सुरेश सांगवान’सरु’  Read more

कितने बदल गये हालात किसी के जाते ही
बदली मौसम की भी जात किसी के जाते ही

गम किस बला का नाम है दर्द का पता ना था
निकली अश्क़ों की बारात किसी के जाते ही  Read more

बातें दिल की हैं हर किसी से कह नहीं सकता
मैं एक क़तरा हूं तनहा तो बह नहीं सकता

सुरेश सांगवान ‘सरु ‘  Read more

ये किस मक़ाम पर जाने तक़दीर मुझे ले आई है
मन तन्हा टूटी कश्ती और फलक़ पे तन्हाई है
–सुरेश सांगवान’सरु’

कुछ आगो-चिंगारी खाक़ मिरी से माँगते हैं
ये लोग पानी भी सूखी नदी से माँगते हैं
–सुरेश सांगवान’सॅरू’

दूरियां दीवार की मोहताज़ नहीं होती
नफ़रते तलवार की मोहताज़ नहीं होती

कौन बोले है न बोले रब के लिये  Read more

आँख में ख़्वाबों को सजाती हूँ
या कहो मुसीबतें बुलाती हूँ

जश्न महफ़िल में मैं मनाती हूँ  Read more

घर मेरी उम्मीदों के सरहद पार तेरा है
दिल के आइने में फिर भी इंतज़ार तेरा है
—सुरेश सांगवान’सरु’

लिखा ही समझते हैं न ज़बानी हमारी
यही है मुद्दत से परेशानी हमारी

दिया जो दिल किसी को वापस नहीं लेते Read more

बादशाह की मात को इक्के निकल आते हैं
पक्के वादे भी जब कच्चे निकल आते हैं

ये क़िताब-ए-ज़िंदगी और रिश्तों के धागे Read more

इसके तेवर तो देखो इंसान से तीखे
हौसला सीखे तो कोई मच्छर से सीखे

—–सुरेश सांगवान’सरु’

तलाश जिसकी रही हाथ वो ख़बर आई
आँखें बंद जब हुई रोशनी नज़र आई
–सुरेश सांगवान’सरु’

दुनियाँ से न्यारी मेरी गुलगुल
पापा की प्यारी मेरी गुलगुल

आँखों का ख़्वाब रातों की नींद  Read more

कोई सवाल ऐसा नहीं जवाब एक रखता हो,
आसमान सा तू कहाँ आफ़ताब एक रखता हो.
— सुरेश सांगवान’सरु’