उसे पाना, उसे खोना, उस के हिज्र (याद ) में रोना,
यही अगर इश्क़ है “मोहसिन” तो हम तनहा ही अच्छे है.

किस्मत ने साथ छोड़ा तो पानी की बूँद के लिए तरस गये
मोहसिन
वरना एक जमाना ऐसा था लोग रो रो के आंसू पिलाते थे…

कितने झूटे थे हम मोहब्बत में
आज तू भी जिन्दा है और में भी

तुझे याद ना करू तो जिस्म टूटता है मेरा फ़राज़
उम्र गुजरी है तेरी याद का नशा करते करते…