शक्ल गर मेरी बदल गयी है
सूरत तुम्हारी भी अलग होगी
ये वक्त कब किसका सगा हुआ है  Read more

कभी पुरानी गलियों में भी हो लेना
के दरवाजे अब भी रास्ता देखते हैं
सुबह कुछ अनमनी सी है दोपहर में  Read more

बेवजह उनकी आँखों में
खुद को तलाशा किये हम
कि ख़ुश्क आँखों में  Read more

एक जंगल में घूम रही हूँ रातदिन
शेर भालू चीते देख रही हूँ रात दिन

नज़रों की खरोंचे सहती हूँ रातदिन  Read more

रोज़ मैं जाने कहाँ ग़ुम हो जाती हूँ
खुद से निकल कर खुद में खो जाती हूँ

लफ्ज़ घूमते रहते हैं मेरे चारों तरफ Read more

मिला कर ए दोस्त
गर तू चाहे मिलना मुझसे

मेरे गीतों में मेरी नज़्मों में Read more

मिलूंगी एक रोज़ ज़िन्दगी तुझसे वादा है मेरा,
पहले ये रोज़ रोज़ की उलझने सुलझा तो दूँ…
आभा..

यादों की कैद से आज़ाद हो भी जाओ अगर
वो रूह कहाँ से लाओगे जो उनकी इबादत न करे..
आभा..

तूने खतों में जो रोशनाई इस्तेमाल की
वो आज तक मेरे दिल में चमकती है….
आभा..

रात भर ख़्वाब आँखों में चलते
रहे सुबह जागे तो कुछ नींद
की खुमारी थी कुछ लौट
के आने से पलकें भारी थी…..
आभा..

मेरी तन्हाइयो से न डर ए दोस्त
हम जहाँ जाते है तुम्हें दिल में ले जाते है…
-आभा